घर जाओ तो यारों से मेरा ज़िकर ना करना...
वोह ज़ब्त ना केर पाएँगे आँखों के समुंदर...
तुम राह गुज़रों से मेरा ज़िकर ना करना...
फूलों के नशेमन में रहा हूँ में सदा से...
देखो कभी खारों से मेरा ज़िकर ना करना...
शायद ये अंधेरे ही मुझे राह दिखायं...
अब चाँद सितारों से मेरा ज़िकर ना करना...
वोह मेरी कहानी को ग़लत रंग ना दे दें...
अफ़साना निगारों से मेरा ज़िकर ना करना...
शायद वोह मेरे हाल पे बेसख़्ता रो दें...
इस बार बहारों से मेरा ज़िकर ना करना...
ले जाएँगे गेहरई में तुम को भी बहा कर...
दरया के किनारों से मेरा ज़िकर ना करना...
वोह शाक्स मिले तोह उससे ह्र बात बता देना...
तुम सिर्फ़ इशारों से मेरा ज़िकर ना करना...!!!!
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रात आज फिर अधूरी सी है
इस ख़ामोशी में हमारी मजबूरी सी है
ना जाने कब से अशक़ झलक रहे है इन आँखों से
दिल में वोह तस्वीर आज भी अधूरी सी है
कभी फ़ुरसत से बैठो मेरे पास में बात कर लो
दिल में ये तमन्ना थोड़ी सी है
काश आप केहते वोह निगाहों की बात
जो बीन ज़ुबान खोले भी पूरी सी है
ना जाने कब तलाक़ कटेगी ये ज़िंदगी
तेरे बिना जिसमे मायूसी सी है
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इंतेज़ार तो करे, के जब वोह आए भी
भूल जाए ह्म, छ्होरे जो मेरे साए भी
कल सुबह एह ज़िंदगी जो ना रही
तमाशा देखेंगे अपने और पराए भी
वोह ग़ैर है तो ग़ैर बनना भी सीख ले
यादो में आके बार-बार आज़माए भी
केहते है दुनीया को, छ्होर देंगे हम्मे
मूड के देखे बार-बार, घबराए भी
एह कैसा खुदा है मेरे दोस्तो
ख़ुद ही लगाए आग, ख़ुद ही भुज़ाए भी
शीकवह भी तो क्या करे हम किसी से
खोया एक हमसफर तो लाखो रेहनुमा पाए भी.
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एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं, मैं..
खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाह्ता हूं, मैं..
दोस्तॊं से दोस्ती तो हर कोई निभाता है..
दुश्मनों को भी अपना दोस्त बनाना चाहता हूं, मैं..
जो हम उडे ऊचाई पे अकेले, तो क्या नया किया..
साथ मे हर किसी के पंख फ़ैलाना चाह्ता हूं, मैं..
वोह सोचते हैं कि मैं अकेला हूं उन्के बिना..
तन्हाई साथ है मेरे, इतना बताना चाह्ता हूं..
ए खुदा, तमन्ना बस इतनी सी है.. कबूल करना..
मुस्कुराते हुए ही तेरे पास आना चाह्ता हूं, मैं..
बस खुशी हो हर पल, और मेहकें येह गुल्शन सारा "अभी"..
हर किसी के गम को, अपना बनाना चाह्ता हूं, मैं..
एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं, मैं..
खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाह्ता हूं, मैं
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